विदिशा जिले के ग्राम आमखेड़ा कस्बा निवासी श्री अंकित मालवीय के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना एक नई उम्मीद लेकर आई। वर्षों से कच्चे मकान में रहने के कारण उन्हें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बारिश के मौसम में घर की स्थिति और भी कठिन हो जाती थी। ऐसे में पक्के मकान का सपना उनके परिवार के लिए एक बड़ी आवश्यकता था।
श्री अंकित मालवीय बताते हैं कि उनके पिता श्री कालूराम मालवीय के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ स्वीकृत हुआ। योजना के माध्यम से उन्हें पक्का मकान बनाने में सहायता मिली और परिवार का वर्षों पुराना सपना साकार हुआ। अब उनका परिवार सुरक्षित और बेहतर आवास में सुख-शांति से जीवन व्यतीत कर रहा है।
पक्के मकान के साथ-साथ इस योजना ने उनके जीवन में स्वरोजगार का अवसर भी पैदा किया। उन्होंने अपने घर में ही किराने की दुकान शुरू की है। इससे उन्हें अपने गांव में रहकर रोजगार प्राप्त करने और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है।
श्री मालवीय प्रधानमंत्री आवास योजना से मिले लाभ के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनके लिए पक्का घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की नई शुरुआत है।
हितग्राही श्री अंकित का पिछला अनुभव -
श्री अंकित मालवीय एवं उनका परिवार पूर्व में कच्चे मकान में निवास करता था। कच्चे मकान के कारण उन्हें विशेष रूप से बारिश के मौसम में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। घर की छत एवं दीवारों से पानी आने की चिंता बनी रहती थी तथा परिवार की सुरक्षा को लेकर भी परेशानी रहती थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण स्वयं के खर्च से पक्का मकान बनाना उनके लिए संभव नहीं था।
कच्चे मकान में रहने के साथ-साथ परिवार के पास स्थायी रोजगार का भी अभाव था। आय के सीमित साधनों के कारण परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई होती थी। पक्के मकान का सपना लंबे समय से था, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
योजना की सहायता से पक्का मकान बनने के बाद उन्हें कच्चे मकान से जुड़ी परेशानियों से राहत मिली और परिवार को सुरक्षित एवं बेहतर आवास उपलब्ध हुआ। इसके साथ ही घर में किराने की दुकान शुरू करने से स्वरोजगार का अवसर मिला, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है।





