शासकीय महाविद्यालय तामिया में गत दिवस राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य श्री नवीन मरकाम ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 18 सितंबर को उनकी स्मृति में बलिदान दिवस मनाया जाता है। छिंदवाड़ा में राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय स्थापित है। हमें उनसे मार्गदर्शन लेकर अपने क्षेत्र की जनता के लिए कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम प्रभारी श्री विजय सिंह सिरसाम ने अपने वक्तव्य में बताया कि राजा शंकर शाह ने अपनी कविताओं और रचनाओं के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ जनता और जमींदारों में देशभक्ति की भावना जगाई तथा उन्हें एकजुट किया। 18 सितंबर 1857 को जबलपुर में अंग्रेजों ने राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह को तोप के मुहाने से बांधकर उड़ा दिया था। उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत केंद्र सरकार के राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा क्षेत्रीय जननायकों के योगदान को याद करते हुए उनके इतिहास को संकलित करने का प्रयास किया गया है।
प्राचार्य श्री अजय नवरे ने कहा कि हमें गोंड राजाओं के इतिहास का अध्ययन कर उनके सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक परिदृश्यों को जानना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उन्होंने किस तरह इतने वर्षों तक प्रकृति के नियमों के आधार पर शासन किया। कार्यक्रम में जनपद उपाध्यक्ष श्री सुधीर अहाके, मंडल सदस्य अतिथि श्री भगत सिंह सरयाम, श्रीमती माधविका उइके, श्रीमती रविना नर्रे, श्री निरंजन राजपूत, श्री मनिंदर भाटिया, श्री विपिन माहौरे, श्री सुरेश भारती, श्रीमती रीता, श्री वासुदेव पाटनकर सहित अन्य विद्यार्थी उपस्थित थे।




