चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के डॉ. जी.सी. नेगी पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय में भेड़-बकरियों में गर्भपात एवं प्रजनन हानि तथा मनुष्यों में संक्रमण से जुड़े महत्वपूर्ण जूनोटिक परजीवी Toxoplasma gondii पर उन्नत शोध किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण अध्ययन के लिए अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) द्वारा नेशनल पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप (N-PDF) प्रदान की गई है।

ANRF की यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी फेलोशिप युवा शोधकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के लिए अवसर एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती है। फेलोशिप के तहत डॉ. दिव्या रत्तन लगभग दो वर्ष की अवधि के लिए शोध करेंगी। वह पशु चिकित्सा सूक्ष्मजीव विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. सुभाष वर्मा के मार्गदर्शन में Toxoplasma gondii की प्रोटिओमिक एवं आणविक प्रोफाइलिंग पर अध्ययन करेंगी। शोध के लिए लगभग 27.12 लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पंकज सूद तथा विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शोध दल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ANRF की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फेलोशिप प्राप्त होना विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है तथा इससे पशु स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य और ‘वन हेल्थ’ से जुड़े अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।

भेड़-बकरियों की प्रजनन क्षमता से मानव स्वास्थ्य तक प्रभाव Toxoplasma gondii विशेष रूप से भेड़ और बकरियों में महत्वपूर्ण संक्रमण का कारण माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान संक्रमण होने पर पशुओं में गर्भपात, भ्रूण की मृत्यु, मृत जन्म अथवा कमजोर संतानों के जन्म जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस परजीवी का महत्व केवल पशु स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। बिल्लियां इसके प्रमुख निश्चित पोषक होती हैं और उनके मल के माध्यम से निकलने वाले सूक्ष्म ऊसिस्ट मिट्टी, पानी, चारे एवं खाद्य पदार्थों को दूषित कर सकते हैं। मनुष्य दूषित भोजन या पानी, ठीक से न धोई गई सब्जियों अथवा संक्रमित मांस के अधपके सेवन से संक्रमित हो सकते हैं।

स्वस्थ व्यक्तियों में संक्रमण कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकता है, जबकि गर्भवती महिलाओं में संक्रमण भ्रूण के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इससे जन्मजात टॉक्सोप्लाज्मोसिस हो सकता है, जो आंखों, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में भी संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

‘वन हेल्थ’ के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण अध्ययन भेड़ और बकरियों के मांस में परजीवी के ऊतक-सीस्ट बने रह सकते हैं। ऐसे में अधपका संक्रमित मांस मनुष्यों में संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है। इसी कारण Toxoplasma gondii को ‘वन हेल्थ’ के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका संबंध पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण—तीनों से है।

प्रस्तावित शोध में परजीवी के महत्वपूर्ण प्रोटीन एवं आणविक संकेतों की पहचान के साथ-साथ इसके पर्यावरणीय रूपों के जीवित एवं संक्रमणकारी बने रहने की क्षमता को समझने का प्रयास किया जाएगा। इससे भविष्य में संक्रमण की बेहतर निगरानी, निदान और नियंत्रण रणनीतियों के विकास में मदद मिलने की उम्मीद है।