प्रदेश में वर्तमान में 7 शासकीय आयुर्वेद, 1 शासकीय होम्योपैथी और 1 शासकीय यूनानी महाविद्यालय संचालित हैं। नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ, शुजालपुर, डिंडौरी और धार में 9 नए शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय स्वीकृत अथवा स्थापनाधीन हैं। इनके लिए 560 शासकीय स्नातक सीटें और 1,570 पद सृजित किए गए हैं। नए चिकित्सालयों के लिए 1,179 तथा 22 आयुष विंगों के लिए 213 पद सृजित हुए हैं। साथ ही 543 आयुर्वेद, 35 होम्योपैथी और 14 यूनानी चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

औषधालय से चिकित्सालय और वेलनेस तक बढ़ा दायरा

आज प्रदेश में 1,773 आयुष औषधालयों के साथ 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 58 आयुष विंग कार्यरत हैं। 50, 30 और 10-बिस्तरीय 36 नए आयुष चिकित्सालय एवं वेलनेस केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। पन्ना, गुना, भिंड, श्योपुर, शुजालपुर और खंडवा में 50-बिस्तरीय चिकित्सालय स्वीकृत हैं, जबकि खजुराहो और उज्जैन सहित विभिन्न स्थानों पर नए स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र विकसित हो रहे हैं।

मध्यप्रदेश में आयुष व्यवस्था ने पिछले दो दशकों में एक उल्लेखनीय परिवर्तन का इतिहास रचा है। वर्ष 2002-03 में मात्र ₹70.38 करोड़ के बजट और सीमित संस्थागत ढांचे से संचालित व्यवस्था आज सितंबर 2026 तक ₹1,209.76 करोड़ के सुदृढ़ वित्तीय आधार, 1,773 आयुष औषधालयों, 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और 58 आयुष विंगों के व्यापक नेटवर्क में परिवर्तित हो चुकी है। आज आयुष की भूमिका पारंपरिक उपचार तक सीमित न रहकर चिकित्सा शिक्षा, वेलनेस, निवारक स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाओं और समग्र जनस्वास्थ्य तक विस्तृत हुई है।

उपचार से निवारक स्वास्थ्य तक बढ़ी भूमिका

प्रकृति परीक्षण से लगभग 8.5 लाख नागरिक जुड़े। ‘आयुर्विद्या’ के माध्यम से 1,723 विद्यालयों के 57,364 विद्यार्थी, ‘सुप्रुजा’ से 52,253 गर्भवती महिलाएं और ‘वयोमित्र’ से 24,263 वरिष्ठ नागरिक जुड़े। ‘घर-घर योग’ से 30 हजार से अधिक नागरिकों तथा ‘वैद्य आपके द्वार’ से लगभग 23 हजार टेलीमेडिसिन परामर्शों के माध्यम से आयुष की पहुंच बढ़ी। 32 जिलों में सिकल सेल से चिन्हित 32,687 लोगों को मानक उपचार के साथ आयुर्वेदिक सहायक चिकित्सा दी जा रही है।